"उफ्फ्फ ये शातिर सहनालायक लोग "

 "उफ्फ्फ! ये शातिर सहनालयक लोग"


दिल में कुछ और जुबां में कुछ और

उफ्फ्फ!ये शातिर सहनालायक लोग

जाने कैसे अपनी फितरत बदल लेते हैं

अदंर इनके विष और ज़बान से कैसे मीठे बोल लेते हैं

उफ्फ्फ! ये शातिर सह नालायक लोग


दूसरों को नीचा दिखाने के फिराक़ में ही

इनके वक़्त गुजरते हैं

इंसान होकर भी ये जाने कैसे? 

गिरगिट से भी तेज अपना रंग बदल लेते हैं

उफ्फ्फ! ये शातिर सह नालायक लोग


बुराई करते करते ही इनके वक़्त गुजर जाते हैं

फालतू बातों की दुहाई देते देते ही 

जिंदगी कट जाते हैं

दूसरों को नीचा गिराने के फिराक़ में खुद ही गिर जाते हैं

उफ्फ्फ! ये शातिर सह नालायक लोग

जाने क्या - क्या कर जाते हैं...... 



_ सुलेखा.


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