क्रोध
"क्रोध, मनोविकार है..."
क्रोध, एक मनोविकार है
फिर भी हरेक शख़्स इसका शिकार है
क्रोधी व्यक्ति जिस पर क्रोध करता है
वह उसे भी व्यग्र कर देता है
क्रोध कितने सृजन का नाश कर देता है
वश में आकर इनके व्यक्ति सर्वस्व गंवा देता है
निम्न से लेकर बड़े से बड़े भी
राज्य,साम्राज्य का विनाश कर देता है
बड़े बुजुर्ग भली -भांति ये जानते हैं
इसलिए सदैव शान्ति का मार्ग ही चुनते हैं
क्रोध के आग में जो जलते हैं
वह खुद ही अपना सर्वनाश कर डालते हैं
क्रोधातिरेक को सहना कायरता नहीं बुद्धिमानी है
सीमारेखा में जीवन जीना ही जिंदगानी
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